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शायरी...

उम्मीदों से भर दीपक इश्क का जला बैठे हम प्यार की लहर में दिल अपना बहा बैठे हम कुछ-कुछ छोड़ सब कुछ अपना तुझ पर निसार बैठे हम तेरी यादों के बल पर जीता था अब तक याद कर - कर उन यादों को जला बैठे हम॥