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डाॅ. अम्बेडकर का दर्द (kavita on Dr. Bhimrao Ambedkar)

बाबा साहब   डाॅ.   भिमराव अम्बेडकर पर कविता बाबा साहब का दर्द... लिखने की इच्छा न थी स्वार्थी कायर इस समाज पर लिखने को मजबूर हुआ मै तो बाबा साहब की नाखुश आवाज पर मै समाज की तारीफ में कोई गुणगान नहीं करूंगा समाज के दुश्मनों का मरते दम सम्मान नहीं करूंगा शर्मिंदगी है मुझको और होगी तुमको भी उन बातो की जो अब तक परिभाषा भी न समझ पाये बाबा के संवादों की। क्या लिखूँ मै अपनी इस पिछड़ती हुई कौम पर है पिघलने को जो तत्पर जा बैठी है उस मोम पर वैसे तो हो आजाद देश में ,पर तुम्हारा कोई वजूद नहीं सोये हो सब के सब पर मान पाने कि सूद नहीं आज़ादी के वर्षो बाद भी सम्मान पाने कि सूद नहीं। क्या इसी लिए बाबा साहब ने आज़ादी का मतलब समझाया था क्या इसी लिए उन्होने तुमको गुलामी से लड़ना सिखलाया था क्या इसी लिए बाबा साहब ने तुमको ताकत दिलवाई थी क्या इसी लिए बाबा ने तुमसे कसमें खिलवाई थी अरे बाबा साहब के परम सपने को ऎसे ना नकेरो तुम और उनकी बनाई कौम को इस तरह ना बिखेरो तुम बाबा साहब की जीवन कहानी तुम भूल गये उनकी संघर्षमय वो ज़वानी तुम भूल ग...