नारियों का प्रतिशोध
नारियो का प्रतिशोध बिना जिसके श्रष्टि अधूरी वो शक्ति तुम्हारी है स्वार्थ निपुर्ण करता है जमाना वो भक्ति तुम्हारी है है तुझसे ही जीवन सबका दुनिया मानती है आज दुजा है दर्जा तेरा दुनिया ये भी तो जानती है आज है जो खाली घट सम्मान का आज तुम्हे ही भरना है मेरे हिन्द की रानियों तुम्हे आगे ही आगे बढ़ना है॥ सहमे से नम आचरण ले गले न कभी लगना है अपनी ताकत पर भरोसा आज तुम्ही को करना है लड़ लड़ाई पुरुषो के संग कदम से कदम चलना है मुकम्मल इस जिंदगी में अब नहीं डरना है मेरे हिन्द की रानियों तुम्हे आगे ही आगे बढ़ना है ये वही वतन है जिसमे नारी शिक्षिका, खोजकर्ता हुई ये वही वतन है नारी जिसमे योद्धा भी हुई न पिछड़ इस युग तू अपने अधिकारों से न बन कमजोर तू अशिक्षा के इन विकारो से वादा तुझको स्वउत्थान हेतु खुद से अब करना है मेरे हिन्द की रानियों तुम्हे आगे ही आगे बढ़ना है पड़ लिख कर समेत ले अब अपने अधिकारों को घट भर ले सम्मान का और दे टक्कर इन पुरुषो को नारी पुरुष लगे समान ऐसा रंगमंच खड़ा करना है ताकत देख तुम्हारी दुष्टो को तो सूली पर चढ़ना है...