संविधान हमारी शान
ना चेहरों पर साज होती, ना सिंहों जैसी गाज होती, ना गली में नाच होता, ना ही चबूतरो पर गान होता, बना लिये जाते फिर से गुलाम अगर लिखा न गया भारत का संविधान होता॥
"मेरा काव्य सफर" यह मेरी अपनी कविताओं का संग्रह है जो कि इस ब्लाॅग के माध्यम से जनसाधारण तक भेज रहा हूँ। यदि इस ब्लाॅग में कोई अन्य कवि या लेखक का लेख या कविता पोस्ट कि जाएगी तो उस कवि या लेखक का नाम अवश्य दर्शाया जायेगा। Ashwin ganesh goyal