संविधान हमारी शान


ना चेहरों पर साज होती,

ना सिंहों जैसी गाज होती,

ना गली में नाच होता,

ना ही चबूतरो पर गान होता,

बना लिये जाते फिर से गुलाम

अगर लिखा न गया

भारत का संविधान होता॥

Comments

Unknown said…
nice line...........

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