Kavita on Teachers Day!
शिक्षक दिवस पर कविता- कर्ज है उनका हम पर अक्षर अक्षर मार दिया जिसने वो दानव, था कभी जो निरक्षर बना जिससे, कोई अल्पज्ञ तो कोई सर्वज्ञ पर छांया में इनकी रहा न कोई अज्ञ॥ अज है जिनका पद, महानता है जिनकी अगम्य गर है इनका आशीश, होती न कोई मंजिल दुर्गम्य कागज़ पे नहीं उभरेगा, अनिर्वचनीय है इनका स्वभाव अलौकिक कहो या कहो ईश्वर, है इनमें तो हरइक भाव असंख्य शब्द न कर सके वर्णन, ऎसी है अद्भूत इनकी छवि मिलता है जिनसे ज्ञान का प्रकाश, केह दो भले ही उन्हें ज्ञान-रवि कहे कोई शिक्षक या कहे गुरू, किन्तु इनका धर्म एक है सत्-सत् प्रणाम करता हूँ उन्हें, जिनके परिणाम अनेक है॥ शिक्षको (गुरूओ) के सम्मान में कविता...लेखक: अश्विन गोयल




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