पेटलावद के आंसू

पेटलावद की घटना पर कविता...


कलम करहाकर रो रही हैं
ये दर्द लिखनें में


फिर भी दर्द बंया कर रही हैं
रुठे इस पन्ने में


जुर्रत की हैं इस लेखक ने
उस नरसंहार पर लिखने की


जिसके शब्द-शब्द में आवाज है
उनके अपनो के बिलखने की


सोच रहा हूँ  कैसे लिखु मैं
उनके अपनो के आलापो को


कैसे लिखु मैं देशवासियों के
उन रौद्र विलापो को


हो गये थे अनाथ कई
हो गये थे बेसहाय कई


हर तड़पते ह्रदय दी थी
दुष्ट अपराधियों को हाय कई


अग्नि के इस शैलाब ने
जला दिये थे उनके आंसूओं को


जिनके खो गये थे अपनो में
जिनके कुछ वादे कर गये थे अपनो को


लिख ना सका मैं राष्ट्रहित में बने
मासूमो के उन भावी सपनो को


क्या हुआ, क्यूं हुआ, कैसे हुआ
काैन इसके जिम्मेदार होंगे


जिम्मेदारों में सत्ता पाए
भूखें कुत्ते ही अब शिकार होंगे


दोस्तो.....

चाहे नेता, चाहे भूपति, हो प्रमुख
या सल्तनत का सुल्तान हो


खेल रहे है जो अवाम से
उन दानवो को तुरंत फांसी पर टांग दो॥




-Kavi Ashwin Ganesh Goyal

Comments

Unknown said…
wah . Good. Writer yr.

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