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Kavita on Teachers Day!
शिक्षक दिवस पर कविता- कर्ज है उनका हम पर अक्षर अक्षर मार दिया जिसने वो दानव, था कभी जो निरक्षर बना जिससे, कोई अल्पज्ञ तो कोई सर्वज्ञ पर छांया में इनकी रहा न कोई अज्ञ॥ अज है जिनका पद, महानता है जिनकी अगम्य गर है इनका आशीश, होती न कोई मंजिल दुर्गम्य कागज़ पे नहीं उभरेगा, अनिर्वचनीय है इनका स्वभाव अलौकिक कहो या कहो ईश्वर, है इनमें तो हरइक भाव असंख्य शब्द न कर सके वर्णन, ऎसी है अद्भूत इनकी छवि मिलता है जिनसे ज्ञान का प्रकाश, केह दो भले ही उन्हें ज्ञान-रवि कहे कोई शिक्षक या कहे गुरू, किन्तु इनका धर्म एक है सत्-सत् प्रणाम करता हूँ उन्हें, जिनके परिणाम अनेक है॥ शिक्षको (गुरूओ) के सम्मान में कविता...लेखक: अश्विन गोयल
पेटलावद के आंसू
पेटलावद की घटना पर कविता ... कलम करहाकर रो रही हैं ये दर्द लिखनें में फिर भी दर्द बंया कर रही हैं रुठे इस पन्ने में जुर्रत की हैं इस लेखक ने उस नरसंहार पर लिखने की जिसके शब्द-शब्द में आवाज है उनके अपनो के बिलखने की सोच रहा हूँ कैसे लिखु मैं उनके अपनो के आलापो को कैसे लिखु मैं देशवासियों के उन रौद्र विलापो को हो गये थे अनाथ कई हो गये थे बेसहाय कई हर तड़पते ह्रदय दी थी दुष्ट अपराधियों को हाय कई अग्नि के इस शैलाब ने जला दिये थे उनके आंसूओं को जिनके खो गये थे अपनो में जिनके कुछ वादे कर गये थे अपनो को लिख ना सका मैं राष्ट्रहित में बने मासूमो के उन भावी सपनो को क्या हुआ, क्यूं हुआ, कैसे हुआ काैन इसके जिम्मेदार होंगे जिम्मेदारों में सत्ता पाए भूखें कुत्ते ही अब शिकार होंगे दोस्तो..... चाहे नेता, चाहे भूपति, हो प्रमुख या सल्तनत का सुल्तान हो खेल रहे है जो अवाम से उन दानवो को तुरंत फांसी पर टांग दो॥ -Kavi Ashwin Ganesh Goyal
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