नारियों का प्रतिशोध

नारियो का प्रतिशोध


बिना जिसके श्रष्टि अधूरी वो शक्ति तुम्हारी है
स्वार्थ निपुर्ण करता है जमाना वो भक्ति तुम्हारी है
है तुझसे ही जीवन सबका दुनिया मानती है आज

दुजा है दर्जा तेरा दुनिया ये भी तो जानती है आज
है जो खाली घट सम्मान का आज तुम्हे ही भरना है
मेरे हिन्द की रानियों तुम्हे आगे ही आगे बढ़ना है॥

सहमे से नम आचरण ले गले न कभी लगना है
अपनी ताकत पर भरोसा आज तुम्ही को करना है
लड़ लड़ाई पुरुषो के संग कदम से कदम चलना है
मुकम्मल इस जिंदगी में अब नहीं डरना है
मेरे हिन्द की रानियों तुम्हे आगे ही आगे बढ़ना है

ये वही वतन है जिसमे नारी शिक्षिका, खोजकर्ता हुई
ये वही वतन है नारी जिसमे योद्धा भी हुई
न पिछड़ इस युग तू अपने अधिकारों से
न बन कमजोर तू अशिक्षा के इन विकारो से
वादा तुझको स्वउत्थान हेतु खुद से अब करना है
मेरे हिन्द की रानियों तुम्हे आगे ही आगे बढ़ना है

पड़ लिख कर समेत ले अब अपने अधिकारों को
घट भर ले सम्मान का और दे टक्कर इन पुरुषो को
नारी पुरुष लगे समान ऐसा रंगमंच खड़ा करना है
ताकत देख तुम्हारी दुष्टो को तो सूली पर चढ़ना है
मेरे हिन्द की रानियों तुम्हे आगे ही आगे बढ़ना है

है वही राष्ट्र जन्मे जहा सीता द्रोपदी के संस्कार
बन जाओ परछाई इनकी और अपना लो इनके संस्कार
फिर न समझेंगे कलंक तुम्हे माँ बाप और ये संसार
बचाकर लाज अपनी तुम्हे ज़माने के साथ बहना है
अरे न ही तख़्त बदलना है न ही ताज बदलना है
राष्ट्र रानियों तुमको दबी आवाज बदलना है
राह दिखा दे जो तख़्त ताज की तिलक उस मिटटी से करना है
बढ़कर उस राह पर हासिल अधिकार व सम्मान करना है
मेरे हिन्द की रानियों तुम्हे आगे ही आगे बढ़ना है

अब बने जो सोच तुम्हारी कभी न वो नीची हो
जग में चमका दे हीरे सा उस मिटटी से सींची हो
दृश्य जहा से हो सारा संसार हासिल सिखर वो करना है
डर कर माफिक कायर के अब नहीं तुमको मारना है
मेरे हिन्द की रानियों तुम्हे आगे ही आगे बढ़ना है॥

दोस्तों  कहत कवि अश्विन तुम्हे टकराओ न इन काँटों से
कांटे बानी है मज़बूरी में उद्धार न होता सन्नाटो से
नारी भी है बलवान डर जेहन में रखना है
करे नारी उचा नाम कभी तो भारत माता की जय कहना है क्यूंकि
मेरे हिन्द की रानियों तुम्हे आगे ही आगे बढ़ना है..

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