मुसीबतों पर जीत की ध्वजा फहराओ



केहते हैं कयामते कभी केह कर नही आती।

कोई जिन्दगी कभी माैत नही चाहती।

मुसीबतो से हार कर जो माैत को लगाते हैं गले।

उनकी छवियां महामानव तो क्या

कभी मानव होने का स्वरूप भी नहीं दर्शाती॥

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