जुदाई की दास्तान

शायरी...


इस कदर दर्द दिया उसने जुदाई का।

किसी को अल्प अल्फ़ाज भी ना दे सका 

मैं अपनी तन्हाई का।

मजबूरीयों में सही लेकिन राह तो उसे मिल ही गई।

लेकिन मुझे क्या सिला मिला अपनी बेइंतेहा इस खुद्दाई का॥

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