Posts

नारियों का प्रतिशोध

नारियो का प्रतिशोध बिना जिसके श्रष्टि अधूरी वो शक्ति तुम्हारी है स्वार्थ निपुर्ण करता है जमाना वो भक्ति तुम्हारी है है तुझसे ही जीवन सबका दुनिया मानती है आज दुजा है दर्जा तेरा दुनिया ये भी तो जानती है आज है जो खाली घट सम्मान का आज तुम्हे ही भरना है मेरे हिन्द की रानियों तुम्हे आगे ही आगे बढ़ना है॥ सहमे से नम आचरण ले गले न कभी लगना है अपनी ताकत पर भरोसा आज तुम्ही को करना है लड़ लड़ाई पुरुषो के संग कदम से कदम चलना है मुकम्मल इस जिंदगी में अब नहीं डरना है मेरे हिन्द की रानियों तुम्हे आगे ही आगे बढ़ना है ये वही वतन है जिसमे नारी शिक्षिका, खोजकर्ता हुई ये वही वतन है नारी जिसमे योद्धा भी हुई न पिछड़ इस युग तू अपने अधिकारों से न बन कमजोर तू अशिक्षा के इन विकारो से वादा तुझको स्वउत्थान हेतु खुद से अब करना है मेरे हिन्द की रानियों तुम्हे आगे ही आगे बढ़ना है पड़ लिख कर समेत ले अब अपने अधिकारों को घट भर ले सम्मान का और दे टक्कर इन पुरुषो को नारी पुरुष लगे समान ऐसा रंगमंच खड़ा करना है ताकत देख तुम्हारी दुष्टो को तो सूली पर चढ़ना है...

जुदाई की दास्तान

शायरी... इस कदर दर्द दिया उसने जुदाई का। किसी को अल्प अल्फ़ाज भी ना दे सका  मैं अपनी तन्हाई का। मजबूरीयों में सही लेकिन राह तो उसे मिल ही गई। लेकिन मुझे क्या सिला मिला अपनी बेइंतेहा इस खुद्दाई का॥

बर्फीली बारिश में प्यार कि पुकार

Image
ये हिम बनकर तेरी यादें बरस रहीं हैं। देख मेरी आँखो की नमी तेरे दीदार को तरस रहीं हैं। मेरी मोहब्बत की आवाज को यूं अनसूना ना कर तु। वरना फिर कहेगी दुनियां पाने को मोहब्बत फिर एक मीरा तड़प रहीं हैं॥

गहरी प्यारी यादें

शायरी... मैं अपनी यारी को इस कदर याद करता हूँ। की मैं अपनी तक़दीर से भी बात करता हूँ। और केहता हूँ की वो मुझे भुलना लाख चाहे  लेकिन भुला ना सकेगी। क्यूंकि उसे पता है मैं आज भी बांहें फैलाकर  उसका इंतजार करता हूँ॥

मुसीबतों पर जीत की ध्वजा फहराओ

केहते हैं कयामते कभी केह कर नही आती। कोई जिन्दगी कभी माैत नही चाहती। मुसीबतो से हार कर जो माैत को लगाते हैं गले। उनकी छवियां महामानव तो क्या कभी मानव होने का स्वरूप भी नहीं दर्शाती॥

पेटलावद के आंसू

पेटलावद की घटना पर कविता ... कलम करहाकर रो रही हैं ये दर्द लिखनें में फिर भी दर्द बंया कर रही हैं रुठे इस पन्ने में जुर्रत की हैं इस लेखक ने उस नरसंहार पर लिखने की जिसके शब्द-शब्द में आवाज है उनके अपनो के बिलखने की सोच रहा हूँ  कैसे लिखु मैं उनके अपनो के आलापो को कैसे लिखु मैं देशवासियों के उन रौद्र विलापो को हो गये थे अनाथ कई हो गये थे बेसहाय कई हर तड़पते ह्रदय दी थी दुष्ट अपराधियों को हाय कई अग्नि के इस शैलाब ने जला दिये थे उनके आंसूओं को जिनके खो गये थे अपनो में जिनके कुछ वादे कर गये थे अपनो को लिख ना सका मैं राष्ट्रहित में बने मासूमो के उन भावी सपनो को क्या हुआ, क्यूं हुआ, कैसे हुआ काैन इसके जिम्मेदार होंगे जिम्मेदारों में सत्ता पाए भूखें कुत्ते ही अब शिकार होंगे दोस्तो..... चाहे नेता, चाहे भूपति, हो प्रमुख या सल्तनत का सुल्तान हो खेल रहे है जो अवाम से उन दानवो को तुरंत फांसी पर टांग दो॥ -Kavi Ashwin Ganesh Goyal

पाकिस्तान

पाकिस्तान के संदर्भ में मैं ज्यादा कुछ तो नहीं केह सकता किन्तु एक बालक के माफिक अपना घुस्सा कुछ पंक्तियों के माध्यम से प्रकट कर रहा हूँ।  छल से वार किया है तुने तु वीर क्या केहलाएगा इतिहासिक पन्नों में सिर्फ इक धब्बा बनकर रह जायेगा अब ना कर तु नाकाम पहल वरना तु हिन्दुस्तान का शिकार  बनकर रह जायेगा । अरे गलती हमारी थी.......२ तुने लोहा आजाद से लिया खड़ा हमने गाँधी को किया पर मत भूल तु... जिस दिन जवाब आजाद देगा तु उसी दिन हिन्दुस्तान के तलवे चाट लेगा ॥ सुन ले पापी पाक... उम्मीद है जिसकी तझे तु कभी पा ना सकेगा सीमा लांग हिन्दुस्तान कभी आ ना सकेगा मत डाल हाथ पापी सांप ले बील में तु ऎसा प्रहार करेगा.........२ की तु अपना राष्ट्रगीत भी खुलकर गा ना सकेगा अपना परचम भी खुलकर लहरा ना सकेगा ॥